कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 7 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
चित्र 7.19 में चित्रित स्थिति के लिए गेंद की यांत्रिक ऊर्जा का मान ठीक उस समय ज्ञात कीजिए जब वह भूतल से टकराती है और दर्शाइए कि इस स्थिति में भी इसका मान mgh ही होगा।
उत्तर

बिंदु C पर पहुँचते समय गेंद के पास कोई स्थितिज ऊर्जा शेष नहीं रहती और गतिज ऊर्जा mgh हो जाती है, अतः उसकी यांत्रिक ऊर्जा तब भी mgh ही है।

वस्तु h ऊँचाई पर बिंदु A से विरामावस्था से छोड़ी जाती है। भूतल (C) को h = 0 मानिए।

C पर ऊँचाई: h′ = 0, अतः स्थितिज ऊर्जा = mg × 0 = 0 J

C पर चाल — v2 = u2 + 2gh में u = 0 रखने पर:
v2 = 0 + 2gh = 2gh

C पर गतिज ऊर्जा:
K = ½mv2 = ½ × m × 2gh = mgh

C पर यांत्रिक ऊर्जा = K + U = mgh + 0 = mgh  ✔

अध्याय में पहले से निकाली गई दो स्थितियों से तुलना कीजिए—

बिंदुस्थितिज ऊर्जागतिज ऊर्जायांत्रिक ऊर्जा
A (t = 0, ऊँचाई h)mgh0mgh
B (समय t, ऊँचाई h – ½gt2)mgh – ½mg2t2½mg2t2mgh
C (भूतल, ऊँचाई 0)0mghmgh
ऐसा क्यों होता है: यहाँ कार्य केवल गुरुत्व कर रहा है। गिरने से वस्तु जितनी स्थितिज ऊर्जा खोती है, ठीक उतनी ही गतिज ऊर्जा प्राप्त कर लेती है। भंडार का केवल नाम बदलता है, कुल मान mgh से हटता नहीं। यही यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण है।
स्वयं जाँचिए: m = 0.5 kg, h = 5 m, g = 10 m s–2 लीजिए। A पर U = 0.5 × 10 × 5 = 25 J। C पर v = √(2 × 10 × 5) = 10 m s–1, अतः K = ½ × 0.5 × 100 = 25 J। दोनों समान।
प्र2.
आपने किसी विज्ञान उद्यान में चित्र 7.22 जैसा प्रदर्श देखा होगा जिसमें एक गेंद को इस प्रदर्श के उच्चतम बिंदु से छोड़ा जाता है। वर्णन कीजिए कि इसमें बिंदु A, B और C पर गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा किस प्रकार परिवर्तित होती है। व्याख्या कीजिए कि बाद में आने वाले शीर्ष C, D तथा E पहले वाले शीर्षों की अपेक्षा कम ऊँचाई वाले क्यों होते हैं? क्या इसका संबंध घर्षण के कारण ऊर्जा के कुछ भाग के अन्य रूपों में परिवर्तित होने से हो सकता है?
उत्तर

गेंद ऊँचे मीनार के शीर्ष से विरामावस्था से छोड़ी जाती है, अतः वहाँ उसकी पूरी यांत्रिक ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा ही होती है। उसके बाद दोनों रूप बारी-बारी बदलते रहते हैं — किंतु कुल मान धीरे-धीरे रिसता रहता है।

आरंभ A B C D E आरंभिक ऊँचाई — फिर कभी नहीं मिलती गति की दिशा
प्रत्येक शीर्ष पिछले से नीचा है, क्योंकि पथ के हर भाग में घर्षण और वायु प्रतिरोध थोड़ी यांत्रिक ऊर्जा ले जाते हैं।
बिंदुऊँचाईस्थितिज ऊर्जागतिज ऊर्जा
A — पहला शीर्षऊँचा, किंतु आरंभ से नीचेअधिककम (अब तक हुई गिरावट जितनी)
B — दो शीर्षों के बीच की घाटीसबसे नीचा, लगभग भूतललगभग शून्य — न्यूनतमअधिकतम — यहाँ गेंद सबसे तेज होती है
C — अगला शीर्षA से नीचाफिर अधिक, किंतु A से कमA की अपेक्षा अधिक
प्रत्येक बिंदु पर: K + U = यांत्रिक ऊर्जा
ढलान से नीचे आते समय: U घटती है, K उतनी ही बढ़ती है
शीर्ष पर चढ़ते समय: K घटती है, U उतनी ही बढ़ती है

C, D तथा E क्रमशः नीचे क्यों — हाँ, इसका कारण घर्षण ही है।

गेंद जितनी ऊँचाई तक चढ़ सकती है, h = यांत्रिक ऊर्जा ÷ mg
पथ के प्रत्येक भाग में घर्षण व वायु प्रतिरोध ऋणात्मक कार्य करते हैं
बाद की यांत्रिक ऊर्जा = पहले की यांत्रिक ऊर्जा – (घर्षण में गई ऊर्जा)
कम यांत्रिक ऊर्जा → अगले शीर्ष की अधिकतम ऊँचाई कम
ऐसा क्यों होता है: गेंद और पटरी के बीच घर्षण तथा वायु प्रतिरोध सदैव गेंद की गति के विरुद्ध कार्य करते हैं। यह ऋणात्मक कार्य हर चक्कर में थोड़ी यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मा और ध्वनि में बदल देता है, और ऊष्मा व ध्वनि गेंद में वापस नहीं लौट सकतीं। इसलिए अभिकल्पक को प्रत्येक शीर्ष पिछले से नीचा बनाना पड़ता है — अन्यथा गेंद के पास उसे पार करने की ऊर्जा ही नहीं बचेगी और वह लौट आएगी।
क्या आप जानते हैं? वास्तविक रोलर कोस्टर भी इसी नियम से बनाए जाते हैं। पहली गिरावट सदैव सबसे ऊँची होती है और उसके बाद का प्रत्येक मोड़ या शीर्ष पिछले से नीचा।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ