प्र1.
चित्र 7.19 में चित्रित स्थिति के लिए गेंद की यांत्रिक ऊर्जा का मान ठीक उस समय ज्ञात कीजिए जब वह भूतल से टकराती है और दर्शाइए कि इस स्थिति में भी इसका मान mgh ही होगा।
उत्तर
बिंदु C पर पहुँचते समय गेंद के पास कोई स्थितिज ऊर्जा शेष नहीं रहती और गतिज ऊर्जा mgh हो जाती है, अतः उसकी यांत्रिक ऊर्जा तब भी mgh ही है।
वस्तु h ऊँचाई पर बिंदु A से विरामावस्था से छोड़ी जाती है। भूतल (C) को h = 0 मानिए।
C पर ऊँचाई: h′ = 0, अतः स्थितिज ऊर्जा = mg × 0 = 0 J
C पर चाल — v2 = u2 + 2gh में u = 0 रखने पर:
v2 = 0 + 2gh = 2gh
C पर गतिज ऊर्जा:
K = ½mv2 = ½ × m × 2gh = mgh
C पर यांत्रिक ऊर्जा = K + U = mgh + 0 = mgh ✔
C पर ऊँचाई: h′ = 0, अतः स्थितिज ऊर्जा = mg × 0 = 0 J
C पर चाल — v2 = u2 + 2gh में u = 0 रखने पर:
v2 = 0 + 2gh = 2gh
C पर गतिज ऊर्जा:
K = ½mv2 = ½ × m × 2gh = mgh
C पर यांत्रिक ऊर्जा = K + U = mgh + 0 = mgh ✔
अध्याय में पहले से निकाली गई दो स्थितियों से तुलना कीजिए—
| बिंदु | स्थितिज ऊर्जा | गतिज ऊर्जा | यांत्रिक ऊर्जा |
|---|---|---|---|
| A (t = 0, ऊँचाई h) | mgh | 0 | mgh |
| B (समय t, ऊँचाई h – ½gt2) | mgh – ½mg2t2 | ½mg2t2 | mgh |
| C (भूतल, ऊँचाई 0) | 0 | mgh | mgh |
ऐसा क्यों होता है: यहाँ कार्य केवल गुरुत्व कर रहा है। गिरने से वस्तु जितनी स्थितिज ऊर्जा खोती है, ठीक उतनी ही गतिज ऊर्जा प्राप्त कर लेती है। भंडार का केवल नाम बदलता है, कुल मान mgh से हटता नहीं। यही यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण है।
स्वयं जाँचिए: m = 0.5 kg, h = 5 m, g = 10 m s–2 लीजिए। A पर U = 0.5 × 10 × 5 = 25 J। C पर v = √(2 × 10 × 5) = 10 m s–1, अतः K = ½ × 0.5 × 100 = 25 J। दोनों समान।