दो-तीन सप्ताह में कलम जुड़ जाती है और पौधा B के टुकड़े पर लगी कलिकाएँ फूट पड़ती हैं। इसके बाद प्ररोह, पत्तियाँ और पुष्प सब पौधा B की किस्म के होते हैं, जबकि कलम के जोड़ से नीचे का पूरा भाग पौधा A ही रहता है। यदि पौधा B पीले गुलाब का था तो अब जंगली गुलाब की जड़ प्रणाली पर पीले गुलाब खिलेंगे।
यह कार्य क्यों करता है: पौधा B का टुकड़ा (सायन) एक कायिक भाग है, अतः वह समसूत्री विभाजन से बढ़ता है और पौधा B के प्रत्येक लक्षण को यथावत बनाए रखता है। उसकी अपनी जड़ें नहीं होतीं, इसलिए उसे पौधा A (मूलवृंत) से इस प्रकार जोड़ना पड़ता है कि जल और खनिज ऊपर उसमें जा सकें और शर्करा नीचे आ सके। यह तभी होता है जब दोनों टुकड़ों का एधा (कैम्बियम) — छाल के ठीक नीचे की पतली विभाजनशील परत — आपस में स्पर्श करे। दोनों एधाओं से नई कोशिकाएँ बनकर मिलती हैं, कैलस बनाती हैं और फिर दारु तथा फ्लोएम जोड़ देती हैं, जिससे दोनों तने एक ही परिवहन तंत्र बन जाते हैं।
पौधा A की अन्य शाखाएँ क्यों काटी जाती हैं (चरण 4): मूलवृंत पर छूटी हुई शाखा जड़ों से आने वाले जल और भोजन के लिए स्पर्धा करती है, और पहले से स्थापित होने के कारण जीत जाती है। उन शाखाओं को हटा देने से पूरी आपूर्ति सायन को मिलती है।
जोड़ को क्यों ढका जाता है (चरण 4): ताजा कटाव एक खुला घाव है। कपड़ा या रैपिंग फिल्म उसे सूखने से बचाती है, कैलस बनने तक दोनों टुकड़ों को दबाकर जोड़े रखती है, और घाव भरने तक कीटों तथा कवक-बीजाणुओं को भीतर नहीं जाने देती।
संकेत: कलमी पौधा आनुवंशिक रूप से दो पौधे हैं जो एक होकर जी रहे हैं। यदि कभी कलम के जोड़ से नीचे कोई प्ररोह फूटे तो वह जंगली मूलवृंत का है और उस पर मूलवृंत के ही पुष्प आएँगे, आपकी चुनी किस्म के नहीं — उसे दिखते ही काट दीजिए।