प्र1.
क्या आपको चित्र 11.6 में दर्शाए अनुसार यीस्ट की जनक कोशिकाओं से निकलते हुए छोटे गोलाकार मुकुल दिखाई देते हैं?
उत्तर
हाँ। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी से अंडाकार यीस्ट कोशिकाएँ दिखाई देती हैं और उनमें से अनेक के एक सिरे पर एक छोटा गोल उभार जुड़ा होता है — यही मुकुल है। कभी-कभी मुकुल पर भी मुकुल होता है, अतः दो, तीन या चार कोशिकाओं की छोटी शृंखलाएँ भी दिखती हैं।
प्रयुक्त शर्करा विलयन = 10 mL में 1 g
= 100 mL में 10 g = 10% (w/v)
ली गई 20 mL में शर्करा = (1 g ÷ 10 mL) × 20 mL = 2 g
= 100 mL में 10 g = 10% (w/v)
ली गई 20 mL में शर्करा = (1 g ÷ 10 mL) × 20 mL = 2 g
इस व्यवस्था में एक-दो घंटे में ही मुकुल क्यों दिखने लगते हैं: यीस्ट को श्वसन के लिए क्रियाधार, ऊष्मा और समय चाहिए। परखनली में दो ग्राम शर्करा उस चुटकी भर यीस्ट के उपयोग से कहीं अधिक है, अतः ऊर्जा सीमित करने वाला कारक नहीं है। ऊष्मा श्वसन और कोशिका विभाजन चलाने वाले एंजाइमों की गति बढ़ा देती है। रुई की डाट कार्बन डाइऑक्साइड को निकलने देती है पर अन्य सूक्ष्मजीवों को भीतर नहीं आने देती, और परखनली को बिना छेड़े रखने से कोशिकाएँ बिना टूटे बैठ जाती हैं और बढ़ती रहती हैं।
संकेत: कवरस्लिप के नीचे बूँद के किनारे पर देखिए, जहाँ कोशिकाएँ एक ही परत में फैली होती हैं। बीच के भीड़ भरे भाग में कोशिकाएँ एक-दूसरे पर पड़ी होती हैं और मुकुल आसानी से छूट जाते हैं।