कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 11 क्रियाकलाप 11.2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्या आपको चित्र 11.6 में दर्शाए अनुसार यीस्ट की जनक कोशिकाओं से निकलते हुए छोटे गोलाकार मुकुल दिखाई देते हैं?
उत्तर

हाँ। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी से अंडाकार यीस्ट कोशिकाएँ दिखाई देती हैं और उनमें से अनेक के एक सिरे पर एक छोटा गोल उभार जुड़ा होता है — यही मुकुल है। कभी-कभी मुकुल पर भी मुकुल होता है, अतः दो, तीन या चार कोशिकाओं की छोटी शृंखलाएँ भी दिखती हैं।

प्रयुक्त शर्करा विलयन = 10 mL में 1 g
= 100 mL में 10 g = 10% (w/v)
ली गई 20 mL में शर्करा = (1 g ÷ 10 mL) × 20 mL = 2 g
इस व्यवस्था में एक-दो घंटे में ही मुकुल क्यों दिखने लगते हैं: यीस्ट को श्वसन के लिए क्रियाधार, ऊष्मा और समय चाहिए। परखनली में दो ग्राम शर्करा उस चुटकी भर यीस्ट के उपयोग से कहीं अधिक है, अतः ऊर्जा सीमित करने वाला कारक नहीं है। ऊष्मा श्वसन और कोशिका विभाजन चलाने वाले एंजाइमों की गति बढ़ा देती है। रुई की डाट कार्बन डाइऑक्साइड को निकलने देती है पर अन्य सूक्ष्मजीवों को भीतर नहीं आने देती, और परखनली को बिना छेड़े रखने से कोशिकाएँ बिना टूटे बैठ जाती हैं और बढ़ती रहती हैं।
संकेत: कवरस्लिप के नीचे बूँद के किनारे पर देखिए, जहाँ कोशिकाएँ एक ही परत में फैली होती हैं। बीच के भीड़ भरे भाग में कोशिकाएँ एक-दूसरे पर पड़ी होती हैं और मुकुल आसानी से छूट जाते हैं।
प्र2.
क्या इन लक्षणों से यीस्ट के द्विगुणित होने के संकेत मिलते हैं?
उत्तर

हाँ — यीस्ट संख्या में बढ़ रहा है और प्रत्येक मुकुल जनक कोशिका की आनुवंशिक प्रतिलिपि है। परंतु ध्यान दीजिए कि वह किस प्रकार बढ़ रहा है — जनक दो बराबर भागों में नहीं बँटता। वह अपनी भित्ति पर किसी एक बिंदु से एक छोटा मुकुल निकालता है।

क्रम इस प्रकार है —

  1. जनक कोशिका का डीएनए प्रतिलिपित होता है और उसका केंद्रक समसूत्री विभाजन से विभाजित होता है।
  2. कोशिका भित्ति पर एक छोटा उभार बनता है।
  3. दोनों समरूप केंद्रकों में से एक कुछ कोशिकाद्रव्य के साथ उस उभार में चला जाता है।
  4. गर्दन पर भित्ति बन जाती है और मुकुल अलग हो जाता है। फिर वह पूरे आकार तक बढ़कर स्वयं मुकुलन करने लगता है।
प्रतियाँ समरूप क्यों होती हैं: समसूत्री विभाजन प्रत्येक गुणसूत्र की एक बार प्रतिलिपि बनाता है और फिर दोनों प्रतियों को अलग-अलग कर देता है, अतः प्रत्येक संतति केंद्रक को जनक जितने ही गुणसूत्र वही सूचना लिए हुए मिलते हैं। न अर्धसूत्री विभाजन है, न दूसरा जनक, अतः न कुछ फेरबदल होता है और न कुछ नया जुड़ता है। इसीलिए संतति क्लोन होती है।
संकेत: ‘द्विगुणित होना’ शब्द आनुवंशिक परिणाम के लिए ठीक है, आकृति के लिए नहीं। अमीबा लगभग बराबर दो कोशिकाओं में बँटता है (द्विविखंडन); यीस्ट में बड़ी जनक कोशिका पर एक छोटा मुकुल बनता है (मुकुलन)। दोनों अलैंगिक हैं, दोनों में समसूत्री विभाजन है, पर कोशिकाद्रव्य का बँटवारा एक में बराबर है और दूसरे में असमान।
प्र3.
ये अवलोकन यीस्ट में जनन को समझने में आपकी किस प्रकार से सहायता करते हैं?
उत्तर

ये आपके अपने सूक्ष्मदर्शी के नीचे सीधे दिखा देते हैं कि यीस्ट मुकुलन द्वारा अलैंगिक जनन करता है — एक ही जनक से, बिना युग्मक के, बिना साथी के, और बहुत तेजी से।

  • एक जनक। हर मुकुल एक ही कोशिका से जुड़ा है। कहीं दो कोशिकाएँ युग्मित होती नहीं दिखीं, अतः न युग्मक है और न निषेचन।
  • आनुवंशिक रूप से समरूप संतति। मुकुल जनक के ही पदार्थ से समसूत्री विभाजन द्वारा बना है, अतः परखनली की सारी जीव संख्या क्लोनों की एक कॉलोनी है।
  • गति। यीस्ट के सक्रिय होने के 1 – 2 घंटे में ही मुकुल दिखने लगते हैं। चूँकि हर नई कोशिका स्वयं मुकुलन कर सकती है, इसलिए जब तक शर्करा और ऊष्मा हैं तब तक कोशिकाओं की संख्या बहुत तेजी से चढ़ती है।
  • परिस्थितियों का महत्त्व। जब तक परखनली गर्म नहीं हुई और शर्करा उपलब्ध नहीं थी तब तक कुछ नहीं हुआ — अलैंगिक जनन अनुकूल परिवेश में ही सबसे तेज होता है, ठीक जैसा अध्याय कहता है।
यह प्रयोगशाला के बाहर क्यों काम आता है: यही मुकुलन आटे को फुलाता है और इडली-डोसा के घोल में शर्करा का किण्वन करता है। श्वसन करती और बढ़ती यीस्ट से निकली कार्बन डाइऑक्साइड आटे में फँसकर उसे फुला देती है। गर्म रसोई में घोल जल्दी फूलता है — उसी कारण से जिस कारण आपकी परखनली को गर्म रखना पड़ा।
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