कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्या जीवों में अलैंगिक जनन की अन्य विधियाँ भी होती हैं?
उत्तर

हाँ। मुकुलन उनमें से केवल एक है। इन सभी में मूल बात एक ही है — एक जनक और समसूत्री विभाजन — और अंतर केवल इतना है कि जनक का शरीर किस प्रकार बाँटा जाता है।

विधिक्या होता हैइस अध्याय में उल्लिखित जीव
द्विविखंडनजनक कोशिका लगभग बराबर दो संतति कोशिकाओं में बँट जाती हैजीवाणु, अमीबा
मुकुलनएक स्थान पर उभार बनता है, बढ़ता है और अलग हो जाता हैयीस्ट, हाइड्रा
बीजाणु निर्माणथैली या पुटिका पर लाखों हल्के बीजाणु बनकर वायु में मुक्त होते हैंराइजोपस, ऐस्पर्जिलस तथा अन्य कवक
कायिक प्रवर्धनपुराने पौधे के तने, पत्ती या भूमिगत भाग से नया पौधा बनता हैआलू, अदरक, मनीप्लांट, गन्ना, ब्रायोफिलम
इन सबको अलैंगिक क्यों कहते हैं: इनमें से किसी में भी युग्मक नहीं बनता और दो कोशिकाओं का युग्मन नहीं होता। गुणसूत्रों की संख्या न कभी आधी होती है और न पुनः पूरी — वह हर विभाजन में वैसी ही बनी रहती है, क्योंकि समसूत्री विभाजन प्रत्येक संतति कोशिका को जनक जैसा ही समूह देता है। इसीलिए हर उत्पाद क्लोन होता है।
प्र2.
आपने पढ़ा है कि खाद्य पदार्थ, जैसे — फल, सूक्ष्मजीवों (कवक) द्वारा सड़ा दिए जाते हैं। ये सूक्ष्मजीव कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर

लगभग सब जगह — जहाँ भी नमी, ऊष्मा और कोई कार्बनिक पदार्थ हो। अध्याय स्वयं इनमें से कई स्थानों की ओर संकेत करता है।

  • वायु में। बीजाणु वायु-धाराओं पर तैरते रहते हैं। क्रियाकलाप 11.3 में आपकी ब्रेड पर फफूँद इसी स्रोत से आई।
  • खुले रखे पके भोजन पर। गर्म मौसम में रसोई की स्लैब पर एक दिन छोड़ देना पर्याप्त है — गंध आने लगती है और रोएँदार धब्बे दिखने लगते हैं।
  • नम दीवारों पर। वर्षा ऋतु में दिखने वाले काले धब्बे कवकों की कॉलोनियाँ ही हैं।
  • मिट्टी और खाद के ढेर में। वहाँ कवक सूखे पत्ते, पुआल और गोबर का अपघटन करते हैं — खाद इसी प्रकार बनती है।
  • सड़े फलों और सब्जियों पर, पुराने चमड़े और नम कपड़ों पर, तथा हमारी त्वचा पर और आँत के भीतर भी।
ये इतनी जगह क्यों मिलते हैं: बीजाणु हल्का और प्रायः एककोशिकीय होता है, अतः मंद वायु-धारा भी उसे उठा ले जाती है। एक ही फफूँद कॉलोनी से लाखों बीजाणु मुक्त होते हैं, इसलिए किसी भी बसे हुए स्थान की वायु में कुछ न कुछ बीजाणु सदैव रहते हैं। यात्रा के दौरान उन्हें सक्रिय रहने की आवश्यकता भी नहीं — बीजाणु सूखा और प्रसुप्त पड़ा प्रतीक्षा कर सकता है और तभी अंकुरित होता है जब वह किसी नम और पोषक स्थान पर उतरे।
प्र3.
ये सूक्ष्मजीव कहाँ से आते हैं?
उत्तर

अन्य जीवित सूक्ष्मजीवों से — उन बीजाणुओं और कोशिकाओं से जो पहले से ही वायु, धूल, जल या सतह पर उपस्थित थे। ये निर्जीव भोजन से स्वयं कभी उत्पन्न नहीं होते।

हम इसके प्रति निश्चित क्यों हैं: लंबे समय तक लोग स्वतः जनन में विश्वास करते थे — कि माँस से कीड़े और ब्रेड से फफूँद अपने आप उत्पन्न हो जाती है। लुई पाश्चर ने प्रयोग द्वारा यह प्रश्न सुलझा दिया। उन्होंने दिखाया कि यदि वायु के सूक्ष्मजीवों को दूर रखा जाए तो पोषक शोरबा अनिश्चित काल तक स्वच्छ बना रहता है और जैसे ही उन्हें प्रवेश दिया जाता है वह तुरंत धुँधला पड़ जाता है। अर्थात नव जीवन सदैव पहले से विद्यमान जीवन से ही उत्पन्न होता है। इसी से उनका रोग का रोगाणु सिद्धांत आया — कि विशेष रोग विशेष सूक्ष्मजीवों से होते हैं — और कोशिका सिद्धांत को पुष्टि मिली कि सभी कोशिकाएँ पहले से विद्यमान कोशिकाओं से ही बनती हैं।

दैनिक जीवन में इसका परिणाम: यदि सूक्ष्मजीव सदैव बाहर से आते हैं तो उन्हें बाहर रोकना या पहले से उपस्थित को नष्ट करना भोजन को सुरक्षित रखेगा और संक्रमण रोकेगा। इसीलिए हम जल उबालते हैं, प्रेशर कुकर में पकाते हैं और शल्य उपकरणों का निर्जर्मीकरण करते हैं, और इसीलिए चिकित्सालय में निर्जर्मीकृत पट्टी पर आग्रह किया जाता है।

संकेत: ध्यान दीजिए कि क्रियाकलाप 11.3 इसी विचार पर कितनी सावधानी से बना है। रुई और टिशू पेपर को पहले से उबाले गए जल से नम किया जाता है, अतः उस जल में कोई जीवित सूक्ष्मजीव नहीं होता। इसके बाद ब्रेड पर जो भी फफूँद उगेगी वह केवल वायु से ही आ सकती है — यह क्रियाकलाप आपका अपना छोटा-सा पाश्चर प्रयोग है।
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