प्र1.
आपने जो विभिन्न पुष्प एकत्रित किए हैं इनके विविध भागों की उपस्थिति को तालिका 11.1 में लिखिए।
उत्तर
बाहर से भीतर की ओर, एक-एक चक्र लेकर चलिए और प्रत्येक भाग के आगे हाँ या नहीं लिखिए। पुस्तक ने स्तंभ ‘क’ पहले ही भर दिया है — बाह्यदल हाँ, दल हाँ, पुंकेसर नहीं, स्त्रीकेसर हाँ — जिससे तुरंत पता चलता है कि पुष्प ‘क’ एक मादा (स्त्रीकेसरी) पुष्प है, जैसे पपीते या कद्दू का मादा पुष्प।
| क्र.सं. | पुष्प के भाग | क (जैसा छपा है — मादा पुष्प) | ख — गुड़हल | ग — सरसों | घ — मक्का का नर पुष्प |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | बाह्यदल | हाँ | हाँ | हाँ | नहीं |
| 2. | दल | हाँ | हाँ | हाँ | नहीं |
| 3. | पुंकेसर | नहीं | हाँ | हाँ | हाँ |
| 4. | स्त्रीकेसर | हाँ | हाँ | हाँ | नहीं |
किसी पुष्प में कोई चक्र अनुपस्थित क्यों हो सकता है: चारों चक्र स्वतंत्र रूप से विकसित होते हैं, अतः पौधा किसी एक को छोड़ सकता है। जहाँ नर और मादा भाग अलग-अलग पुष्पों में होते हैं — जैसे मक्का, पपीता और कद्दू में — वहाँ स्व-परागण असंभव या कठिन हो जाता है और पौधा पर-परागण की ओर, अर्थात अधिक विभिन्नता की ओर, धकेल दिया जाता है। और जहाँ दल अनुपस्थित हैं, जैसे घासों में, वहाँ इसका कारण यह है कि पुष्प वायु-परागित है और उसे दलों की आवश्यकता ही नहीं।
संकेत: ‘अन्य विशेषता(एँ)’ वाला स्तंभ भी अवश्य भरिए — वर्तिकाग्र चिपचिपा है या पंखनुमा? दल जुड़कर नली बने हैं? परागकोश चूर्णिल है? यही विवरण आपको अभ्यास प्रश्न 11 में परागण के माध्यम का अनुमान लगाने योग्य बनाएँगे।