कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्या आप पुष्प के सबसे आकर्षक भाग — रंगीन दल के कार्य का अनुमान लगा सकते हैं?
उत्तर

दल परागणकारी को आकर्षित करते हैं। वे पुष्प को दूर से दिखाई देने योग्य बनाते हैं, और अनेक पुष्पों में गंध ग्रंथियाँ भी उन्हीं पर होती हैं और मकरंद उन्हीं के आधार पर।

पौधा दलों पर इतना क्यों खर्च करता है: पौधा चल नहीं सकता, अतः उसके परागकण को किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचाया ही जाना है। वायु यह करेगी, पर अपव्ययी ढंग से — वायु-परागित घास को 50 – 200 बीज पाने के लिए प्रति पुष्प पाँच से दस लाख परागकण छोड़ने पड़ते हैं। इसके विपरीत कीट एक ही प्रकार के पुष्प से उसी प्रकार के दूसरे पुष्प पर उड़ता है, अतः उसके शरीर पर लगे परागकण के काम की जगह पहुँचने की संभावना अच्छी होती है। कीट-परागित सूरजमुखी को केवल 20,000 – 40,000 परागकणों से 800 – 1,000 बीज मिल जाते हैं। यही सटीकता दल खरीदते हैं।

दल और भी काम करते हैं — वे कीट के लिए उतरने का मंच बनाते हैं, अनेक पर मकरंद-निर्देशक रेखाएँ या धब्बे होते हैं जो आगंतुक को मकरंद की ओर और साथ ही परागकोश तथा वर्तिकाग्र की ओर ले जाते हैं, और कुछ पौधों में रात को बंद होकर भीतरी भागों की रक्षा करते हैं।

क्या आप जानते हैं? मधुमक्खियाँ पराबैंगनी प्रकाश देख सकती हैं, हम नहीं। अनेक पुष्प जो हमें सादे पीले दिखते हैं, उन पर मकरंद के चारों ओर पराबैंगनी में स्पष्ट निशाने जैसे चिह्न बने होते हैं जो मधुमक्खी को दिखाई देते हैं।
प्र2.
आपने सीखा है कि फलों के निर्माण के लिए पुंकेसर से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण आवश्यक है। आप इसकी जाँच किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर

ऐसे प्रयोग द्वारा जो परागकण को, या उसे ले जाने वाले आगंतुकों को, हटा दे और फिर देखे कि फल बनते हैं या नहीं — ठीक वही जो क्रियाकलाप 11.6 मटर के पौधे पर करता है।

इस अभिकल्प में तीन चालें हैं —

  1. पुंकेसर हटाइए (विपुंसन) कुछ पुष्पों से, जिससे वह पुष्प अपना परागकण दे ही न सके।
  2. मलमल की थैली से ढकिए, जिससे बाहर से भी परागकण न आ सके। पॉलिथीन के स्थान पर मलमल इसलिए, कि वायु और प्रकाश तो भीतर जाते रहें — अन्यथा आप परागण की नहीं, दम घुटने की जाँच कर रहे होते।
  3. नियंत्रण रखिए — एक पुष्प जिसके पुंकेसर सहित उसे थैली से ढका गया हो और एक पुष्प जो पूरी तरह खुला छोड़ा गया हो। इनके बिना आप यह बता ही नहीं सकते थे कि फल न बनना परागकण की कमी से हुआ या थैली से।
एक बार में केवल एक ही बात क्यों बदली जाती है: उचित परीक्षण के लिए शेष सभी परिस्थितियाँ — वही पौधा, पुष्प की वही अवस्था, वही जल, वही धूप, गिनने का वही दिन — सभी विधियों में समान होनी चाहिए। तभी फल-निर्माण में आया अंतर केवल उसी एक कारक के कारण हो सकता है जिसे आपने बदला था, अर्थात परागकण की उपलब्धता। यही तर्क अभ्यास प्रश्न 10 और 12 में फिर आएगा।
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