कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 11 खोज जारी है… के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्या अमीबा या यीस्ट जैसे एककोशिकीय जीव में कभी ‘जरण’ (aeging) होता है? जब यह विभाजित होता है तो लगभग दो समान प्रतियाँ (कॉपी) उत्पन्न करता है। तो क्या उनमें कोई जरण भी होता है?
उत्तर

सच्चा उत्तर यह है: यह इस पर निर्भर है कि विभाजन क्षति को बराबर बाँटता है या नहीं — और यीस्ट में वह बराबर नहीं बाँटता, अतः यीस्ट कोशिका वास्तव में बूढ़ी होती है।

पहले यह तय कीजिए कि जरण है क्या। जरण समय बीतना नहीं है; वह उस क्षति का संचय है जिसकी मरम्मत नहीं हुई — क्षतिग्रस्त प्रोटीन, क्षतिग्रस्त झिल्लियाँ, डीएनए में त्रुटियाँ। अतः प्रश्न यह बन जाता है कि जब एक कोशिका विभाजित होती है तब वह क्षति कहाँ जाती है।

जीवविभाजन क्षति को कैसे बाँटता हैक्या जरण होता है?
अमीबा (द्विविखंडन)लगभग बराबर, दो लगभग समरूप संतति कोशिकाओं मेंक्षति हर पीढ़ी में आधी हो जाती है, अतः कभी एकत्र नहीं होती। भोजन भरपूर हो तो संवर्धन में अमीबा अनिश्चित काल तक विभाजित होता रहता है — जरण दिखाई नहीं देता
यीस्ट (मुकुलन)असमान रूप से। क्षतिग्रस्त प्रोटीनों का अधिकांश जनक कोशिका अपने पास रख लेती है; छोटा मुकुल स्वच्छ आरंभ करता हैहाँ। जनक कोशिका लगभग 20 – 30 मुकुल ही बना पाती है और फिर विभाजन बंद करके मर जाती है
ई. कोलाई जैसे जीवाणुलगभग बराबर, पर जिस संतति को कोशिका का पुराना सिरा मिलता है उसे अधिक क्षति भी मिलती हैजरण का एक मंद रूप — वह संतति कुछ धीमी वृद्धि करती है
मुकुलन करता यीस्ट स्पष्ट उदाहरण क्यों है: हर बार मुकुल निकालने पर यीस्ट कोशिका की भित्ति पर एक स्थायी मुकुल चिह्न रह जाता है। सूक्ष्मदर्शी से ये चिह्न गिनकर आप बता सकते हैं कि उस कोशिका ने कितनी बार विभाजन किया है। लगभग बीस से तीस मुकुलों के बाद वह कोशिका विभाजन ही बंद कर देती है, बड़ी और बेडौल हो जाती है और मर जाती है। इसी बीच उसके बनाए हर मुकुल ने अपना जीवन ‘युवा’ आरंभ किया और अपनी पूरी संख्या में मुकुल बनाए। अर्थात जनक बूढ़ा होता है और संतति नई हो जाती है — और यह अंतर उनके जीनों में नहीं, जो समरूप हैं, बल्कि इसमें है कि कोशिका की सामग्री उनके बीच किस प्रकार बाँटी गई। इसे प्रतिकरण जरण कहते हैं, और यीस्ट इसके अध्ययन के लिए प्रयोगशाला का प्रमुख जीव है।

तो वंश का क्या? यहाँ आपकी सहज बुद्धि ठीक है। अमीबा के विभाजन के बाद न कोई जनक बचता है और न कोई शव — केवल दो अमीबा होते हैं। इस अर्थ में वंश बूढ़ा नहीं होता और सिद्धांततः अनंत काल चल सकता है। बूढ़ी हो सकती है वह विशेष कोशिका जो अपनी क्षति आगे देने के बजाय अपने पास रख लेती है।

संकेत — आगे बढ़ाने योग्य प्रश्न: यदि असमान विभाजन मात्र से कोई कोशिका फिर से ‘युवा’ हो सकती है, तो वास्तव में पुनः स्थापित क्या होता है? इस प्रश्न पर आज भी शोध चल रहा है और उसका बड़ा भाग यीस्ट पर ही होता है। ध्यान दीजिए कि इस अध्याय में पहले पढ़ा लुई पाश्चर का सिद्धांत यहाँ भी टिका हुआ है — नव जीवन सदैव पहले से विद्यमान जीवन से ही उत्पन्न होता है, पर सदैव उसी दशा में नहीं।
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