प्र1.
क्या आपको थैली नुमा गोलाकार सिरे वाली धागे जैसी संरचनाएँ दिखती हैं? क्या आप थैली के अंदर छोटी-छोटी गोलाकार संरचनाएँ (बीजाणु) भी देख पाते हैं?
उत्तर
दोनों का उत्तर हाँ है। धागे जैसी संरचनाएँ कवक तंतु हैं, सीधे तंतु के सिरे पर लगी गोल थैली बीजाणुधानी है और उसमें भरी छोटी गोल रचनाएँ बीजाणु हैं।
| संरचना | कैसी दिखती है | क्या करती है |
|---|---|---|
| कवक तंतु | ब्रेड पर और उसके भीतर फैले महीन शाखित धागे | ब्रेड पर एंजाइम स्रावित करते हैं, मंड को पचाते हैं और उत्पाद अवशोषित करते हैं — कवक इसी प्रकार भोजन लेता है |
| सीधी डंडी | चटाई से ऊपर उठा हुआ एक तंतु | थैली को सतह से ऊपर उठाकर चलती वायु में ले जाती है |
| थैली (बीजाणुधानी) | गोल, गहरे रंग की, पिन के सिर जितनी | बीजाणुओं को तैयार होने तक घेरे और सुरक्षित रखती है |
| बीजाणु | छोटी गोल रचनाएँ, प्रायः एक-एक कोशिका | प्रकीर्णन और जनन — प्रत्येक अंकुरित होकर पूरी नई फफूँद बन सकता है |
यह अलैंगिक जनन क्यों है: बीजाणु अकेली जनक फफूँद से समसूत्री विभाजन द्वारा बनता है। वह युग्मक नहीं है, किसी से युग्मित नहीं होता, और उससे उगने वाली फफूँद में ठीक जनक जैसा ही गुणसूत्र समूह होता है। एक जनक, समसूत्री विभाजन, समरूप संतति — यही अलैंगिक जनन की परिभाषा है।