कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
फलों और बीजों के निर्माण के लिए परागकणों का वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण महत्त्वपूर्ण है। प्रकृति ने पौधों को परागण के लिए विभिन्न युक्तियाँ प्रदान की हैं। आपके विचार से यदि परागण नहीं हो तो क्या होगा?
उत्तर

फल तक पहुँचने वाली पूरी शृंखला अपनी पहली ही कड़ी पर रुक जाएगी। इसे क्रम से देखिए —

वर्तिकाग्र पर परागकण नहीं → वर्तिका में पराग नलिका नहीं
→ नर युग्मक बीजांड तक कभी नहीं पहुँचता
निषेचन नहीं → युग्मनज नहीं → भ्रूण नहीं
→ बीजांड बीज नहीं बनते
→ अंडाशय बढ़ता नहीं → फल नहीं

अपरागित पुष्प बस मुरझाकर पौधे से गिर जाता है।

एक पुष्प से आगे इसका अर्थ —

  • फसल के लिए — न अनाज, न दालें, न फल। पौधा स्वस्थ दिखे और खूब फूले, फिर भी उपज शून्य।
  • अगली ऋतु के लिए — बीज ही नहीं, अतः बोने को कुछ नहीं।
  • उन सबके लिए जो वे बीज और फल खाते हैं — पक्षी, जंतु और मनुष्य वह भोजन खो देते हैं।
  • जाति के लिए — लैंगिक जनन से कोई नया जीव नहीं, अतः लक्षणों के नए संयोजन नहीं और विभिन्नता नहीं। जो पौधा कायिक रूप से फैल सकता है वह बचा रहेगा, पर केवल क्लोनों के रूप में।
यह काल्पनिक नहीं, वास्तविक समस्या क्यों है: अभ्यास प्रश्न 12 ठीक यही घटित होते हुए बताता है — निचले हिमालयी क्षेत्र में सेब की उपज इसलिए घट रही है कि प्राकृतिक परागणकारियों की जनसंख्या गिर गई है। पुष्प खिलते तो हैं, पर उनमें से बहुत कम परागित होते हैं, अतः बहुत कम में फल लगते हैं। मधुमक्खी की कालोनी लाकर यह टूटी कड़ी फिर से जोड़ दी जाती है।
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