प्र1.
रवि अचानक देखता है कि उसकी लंबाई तीव्रता से बढ़ रही है, उसके कंधे चौड़े हो रहे हैं और आवाज में परिवर्तन हो रहा है। सोचिए कि वह जीवन की किस अवस्था में प्रवेश कर रहा है?
उत्तर
रवि यौवनारंभ में प्रवेश कर रहा है — किशोरावस्था की वह अवस्था जिसमें शरीर जनन के योग्य हो जाता है। उसने जो तीनों परिवर्तन देखे हैं वे इसी के प्रारूपिक लक्षण हैं।
| रवि क्या देखता है | भीतर क्या हो रहा है |
|---|---|
| लंबाई में तीव्र वृद्धि | वृद्धि की तीव्र अवस्था — हार्मोन के प्रभाव में लंबी अस्थियाँ तेजी से लंबी होती हैं |
| कंधों का चौड़ा होना | कंधे की अस्थियों और पेशियों का विकास, जो अध्याय के अनुसार वृषण के हार्मोन द्वारा लड़कों में लाए जाने वाले शारीरिक परिवर्तनों में से एक है |
| आवाज में परिवर्तन | कंठ (स्वरयंत्र) बड़ा होता है और स्वर-रज्जु लंबे तथा मोटे हो जाते हैं, अतः आवाज का तारत्व नीचे उतर आता है |
आवाज सीधे भारी होने के बजाय ‘फटती’ क्यों है: स्वर-रज्जु कुछ महीनों में लंबे तो हो जाते हैं, पर उनका तनाव नियंत्रित करने वाली पेशियों को नई लंबाई के साथ काम करना फिर से सीखने में समय लगता है। उस अवधि में तारत्व पुराने ऊँचे और नए नीचे स्वर के बीच अनियमित रूप से फिसलता रहता है। वृद्धि पूरी होने और नियंत्रण फिर से सध जाने पर यह रुक जाता है।
यह सब चला क्या रहा है: अब वृषण एक हार्मोन बनाते हैं — ऐसा रसायन जो शरीर के अन्य भागों के कार्यों को नियंत्रित करता है। अध्याय कहता है कि यह शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करता है और यौवनारंभ में लड़कों में दिखाई देने वाले शारीरिक परिवर्तनों का कारण भी बनता है। अर्थात जो संकेत शुक्राणु निर्माण आरंभ करता है वही लंबाई, कंधे और आवाज भी ला रहा है।
संकेत: अध्याय एक और बात सावधानी से जोड़ता है जो रवि को सुननी चाहिए। लैंगिक परिपक्वता और भावनात्मक परिपक्वता एक नहीं हैं। शरीर क्रमशः जनन के योग्य हो जाता है, पर भावनाओं पर नियंत्रण रखने, स्पष्ट रूप से संवाद करने और सुविचारित निर्णय लेने में अधिक समय लगता है।