प्र1.
गुड़हल (Hibiscus or China-rose) के एक पौधे में परागकण के वर्तिकाग्र पर पहुँचने के पश्चात पराग नलिका वर्तिका से होते हुए आगे बढ़ती है। इसके पश्चात कौन-सी प्रक्रिया होने वाली है?
उत्तर
निषेचन। पराग नलिका बीजांड की ओर बढ़ रही है, और जैसे ही उसके भीतर का नर युग्मक अंडकोशिका से युग्मित होगा, निषेचन हो जाएगा और युग्मनज बन जाएगा।
परागण → वर्तिकाग्र पर परागकण का अंकुरण → वर्तिका से नीचे पराग नलिका की वृद्धि
→ नलिका अंडाशय में प्रवेश करके बीजांड तक पहुँचती है
→ नर युग्मक का अंडकोशिका से युग्मन = निषेचन
→ युग्मनज → भ्रूण; बीजांड → बीज; अंडाशय → फल
→ नलिका अंडाशय में प्रवेश करके बीजांड तक पहुँचती है
→ नर युग्मक का अंडकोशिका से युग्मन = निषेचन
→ युग्मनज → भ्रूण; बीजांड → बीज; अंडाशय → फल
नलिका की आवश्यकता ही क्यों पड़ती है: नर युग्मक की कोई पूँछ नहीं होती और वह तैर नहीं सकता, जबकि अंडकोशिका अंडाशय की तली में बीजांड के भीतर बंद है — वर्तिकाग्र से कई मिलीमीटर नीचे। परागकण इसका समाधान एक नलिका उगाकर करता है, जो उसका ही जीवित विस्तार है और वर्तिका के ऊतक से होती हुई नीचे बढ़कर युग्मक को ठीक बीजांड तक पहुँचा देती है। पौधे में नर युग्मक यात्रा नहीं करता; नलिका उसे ले जाती है।
संकेत: दोनों शब्द अलग रखिए। परागण केवल परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकण का स्थानांतरण है। निषेचन दो युग्मकों का युग्मन है। परागण होकर भी निषेचन न हो, यह संभव है — जैसे तब जब परागकण गलत जाति का हो और उस वर्तिका में नलिका न उगा सके।