कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.5 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
घास फाण्ट (सूखी घास का घोल) बनाने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन कीजिए — 1. उद्यान की घास कटने के पश्चात उसके छोटे प्रतिदर्श इकट्ठा कीजिए, अथवा भूसा या चारा लीजिए। 2. एक छोटी काँच की बोतल लीजिए और उसका एक-चौथाई भाग घास, भूसे या चारे से भरिए। 3. बोतल को रुद्ध जल या तालाब के जल से भरिए और उसमें एकत्रित पादप सामग्री मिला दीजिए। 4. बोतल को मलमल के कपड़े से ढककर धागे से बाँध दीजिए। 5. बोतल को बिना छेड़े एक सप्ताह तक एक तरफ रख दीजिए। 6. मलमल के कपड़े को हटाकर बोतल का मुँह बस इतना खोलिए कि उसमें बिंदुपाती (dropper) डाला जा सके, और बिंदुपाती की सहायता से सावधानीपूर्वक जल की एक बूँद लीजिए। 7. जल की इस बूँद को एक स्वच्छ स्लाइड पर रखिए और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से उसका अवलोकन कीजिए।
उत्तर

सातों चरणों का ठीक-ठीक पालन कीजिए। महत्त्वपूर्ण यह समझना है कि हर चरण क्यों है — यह क्रियाकलाप गंदे जल का जार नहीं, एक छोटा सुनियोजित प्रयोग है।

चरणयह किसलिए है
घास, भूसा या चारामृत कार्बनिक पदार्थ देता है — वह भोजन जिस पर पहले जीवाणु बढ़ेंगे
रुद्ध जल या तालाब का जलआरंभिक प्रोटिस्ट देता है; स्वच्छ नल के जल से लगभग कुछ नहीं मिलेगा
मलमल का कपड़ा, बाँधकरवायु (ऑक्सीजन) भीतर आने देता है परंतु कीट और धूल रोकता है
एक सप्ताह बिना छेड़ेजनसंख्या बढ़ने का समय। सड़ती घास पर पहले जीवाणु बढ़ते हैं, फिर उन्हें खाने वाले प्रोटिस्ट
स्वच्छ स्लाइड पर एक बूँदपतली परत — मोटा जल फोकस नहीं होता और जीव दृष्टि-तल से बाहर तैर जाते हैं
सावधानी — पुस्तक का सुरक्षा निर्देश मानिए। घास के घोल से दुर्गंध आ सकती है। लैब कोट, मास्क और दस्ताने पहनिए, और सूखी घास के घोल को ऑटोक्लेव करने के पश्चात ही फेंकिए। ऑटोक्लेव करने से उसमें उपस्थित सभी जीव नष्ट हो जाते हैं।
संकेत: बूँद सतह के पास से और तैरती झाग के किनारे से लीजिए, बीच के स्वच्छ भाग से नहीं — प्रोटिस्ट वहीं सघन होते हैं। हवा के बुलबुले से बचने के लिए कवर स्लिप को तिरछा करके रखिए।
प्र2.
क्या आपने सूक्ष्मदर्शी द्वारा जल की बूँद का अवलोकन करने पर उसमें चलते हुए जीव देखे हैं? क्या आप इन्हें चित्र 12.7 से तुलना करके पहचान सकते हैं?
उत्तर

हाँ — बूँद गति से भरी होती है, और वही गति पहचान का पहला संकेत है। चित्र 12.7 तीन सबसे सामान्य प्रोटिस्ट दिखाता है — अमीबा, पैरामीशियम और यूग्लीना। तीनों की गति की विधि बिल्कुल भिन्न है।

जीवकैसा दिखता हैकैसे चलता हैकैसे पोषण लेता है
अमीबाकोई निश्चित आकार नहीं; कणिकामय पिंड जिसमें केंद्रक दिखता हैकूटपाद निकालकर धीरे-धीरे बहता हैविषमपोषी — भोजन कणों को घेर लेता है
पैरामीशियमचप्पल जैसा, निश्चित आकार, पूरे शरीर पर महीन रोमपक्ष्माभों की ताड़न से तेज़, चक्राकार गतिविषमपोषी — जीवाणुओं को मुख खाँच में बुहारता है
यूग्लीनातर्कु के आकार का, हरा, लाल नेत्रबिंदु सहितएक लंबे कशाभ से आगे बढ़ता हैप्रकाश में स्वपोषी; अंधकार में विषमपोषी
ये सब एक ही जगत में क्यों: इनमें से प्रत्येक एक अकेली सुकेंद्रकी कोशिका है — एक कोशिका जिसमें वास्तविक केंद्रक है, और जो जल या नम स्थान में रहती है। आकृति, गति और यहाँ तक कि पोषण में भी ये अत्यंत भिन्न हैं, और यही कारण है कि प्रोटिस्टा इतना मिश्रित जगत है — इसकी परिभाषा कोशिका प्रकार और संगठन के स्तर से बनी है, जीवन शैली से नहीं।
ध्यान दीजिए: यूग्लीना सबसे असुविधाजनक उदाहरण है — पादप की भाँति हरा और प्रकाश संश्लेषी, फिर भी जंतु की भाँति तैरने और खाने में सक्षम। ऐसे ही जीवों ने पुरानी द्विजगत प्रणाली को तोड़ा और हेकल को वर्ष 1866 में प्रोटिस्टा जोड़ने पर विवश किया।
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