प्र1.
अपने आस-पास से विभिन्न पत्तियाँ एकत्र कीजिए और उनके आकार तथा शिरा-विन्यास का अवलोकन कीजिए। इसके साथ ही इन्हें एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री में समूहित कीजिए। चर्चा कीजिए कि इनकी संरचनाएँ उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होने में किस प्रकार सहायता करती हैं।
उत्तर
पत्तियों को शिरा-विन्यास के आधार पर छाँटिए — यही एक लक्षण एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री को भरोसे के साथ अलग कर देता है।
| विशेषता | एकबीजपत्री पत्ती | द्विबीजपत्री पत्ती |
|---|---|---|
| शिरा-विन्यास | समांतर — शिराएँ आधार से सिरे तक साथ-साथ चलती हैं | जालिकावत — मध्य शिरा से निकलता शाखित जाल |
| आकार | लंबी, सँकरी, फीते या फलक जैसी | चौड़ी, प्रायः स्पष्ट फलक और वृंत सहित |
| एकत्र करने योग्य उदाहरण | घास, मक्का, गेहूँ, गन्ना, केला, कैना, प्याज | नीम, आम, पीपल, गुड़हल, तुलसी, गुलाब, चना, सूरजमुखी |
ये संरचनाएँ उत्तरजीविता में कैसे सहायक हैं — चर्चा के बिंदु
- समांतर शिराएँ और सँकरा फलक (एकबीजपत्री) पवन में फटने के स्थान पर झुक जाते हैं और जल शीघ्र बहा देते हैं। घास पत्ती के आधार से बढ़ती है, इसलिए चरे जाने या काटे जाने के बाद भी फलक फिर उग आता है — यही एक कारण है कि जहाँ चराई अधिक हो वहाँ घासें ही छाई रहती हैं।
- चौड़ी जालिकावत पत्तियाँ (द्विबीजपत्री) सूर्य के प्रकाश के सामने बड़ा क्षेत्रफल रखती हैं, अतः अधिक प्रकाश ग्रहण करती हैं — छायादार वन के नीचे यह लाभदायक है। शाखित शिरा-जाल का अर्थ यह भी है कि फटी पत्ती का शेष भाग भी पूर्ति पाता रहता है, क्योंकि जल दरार के चारों ओर से जा सकता है।
- मोटी, मोमी या छोटी पत्तियाँ — जैसे शुष्क स्थानों के अनेक पौधों में — जल की हानि घटाती हैं; इसका चरम उदाहरण चीड़ की सुई जैसी पत्ती है।
- बड़ी, कोमल, पतली पत्तियाँ — जैसे केला या वर्षावन के पौधे — वहाँ मिलती हैं जहाँ जल पर्याप्त और पवन कम हो; केले की पत्ती पवन में अपनी समांतर शिराओं के साथ फट जाती है, जिससे पौधा उखड़ने के स्थान पर दबाव से बच जाता है।
कॉपी के लिए नमूना उत्तर: "मैंने 12 पत्तियाँ एकत्र कीं। घास, मक्का, केला और कैना में समांतर शिराएँ और लंबे सँकरे फलक थे — ये एकबीजपत्री हैं। नीम, आम, गुड़हल, पीपल, तुलसी, गुलाब, चना और सूरजमुखी में मध्य शिरा और शाखित जाल था — ये द्विबीजपत्री हैं। नीम और आम की पत्तियाँ चमड़े जैसी और चमकदार थीं, जिससे हमारी शुष्क गर्मी में जल की हानि कम होती है, जबकि तुलसी की पत्ती पतली और कोमल थी और जल न मिलने पर पौधा शीघ्र मुरझा जाता है।"