प्र1.
प्रत्येक पादप समूह की विशिष्ट विशेषताओं का ध्यानपूर्वक अध्ययन कीजिए।
उत्तर
पाँचों समूहों को क्रम से पढ़िए और देखिए कि हर एक कौन-सी एक समस्या हल करता है। इस तरह रखने पर तालिका 12.3 सूची नहीं, एक क्रम बन जाती है।
| समूह | विशिष्ट विशेषताएँ | यह कौन-सी समस्या हल करता है |
|---|---|---|
| थैलोफाइटा | शरीर थैलस जैसा; परिवेश से गैसों, पोषक तत्वों और जल का सीधा आदान-प्रदान; अधिकांशतः जलीय। उदाहरण: स्पाइरोगाइरा | अभी कोई नहीं — यह केवल जल के लिए भली-भाँति अनुकूलित है |
| ब्रायोफाइटा | मूलाभास, तने व पत्ती जैसी संरचनाएँ; संवहनी ऊतक नहीं; जनन के लिए जल आवश्यक। उदाहरण: मार्केशिया, मॉस | स्थल पर निवास — परंतु केवल वहीं जहाँ नमी बनी रहे |
| टेरिडोफाइटा | वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ; जाइलम और फ्लोएम; बीज नहीं; जनन के लिए जल आवश्यक। उदाहरण: फर्न | परिवहन और अवलंब — जिससे पौधा ऊँचा बढ़ सके |
| जिम्नोस्पर्म | सुई या शल्क जैसी पत्तियाँ; बीज फलों में बंद नहीं, शंकुओं पर अनावृत; निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं। उदाहरण: चीड़, साइकैड | जल के बिना जनन, तथा ठंडे और शुष्क स्थानों में उत्तरजीविता |
| एंजियोस्पर्म | सुविकसित जड़, तना और पत्तियाँ; पुष्पों द्वारा लैंगिक जनन; बीज फलों के अंदर बंद; बीज कीटों, पक्षियों, जंतुओं, वायु या जल द्वारा प्रकीर्णित। उदाहरण: गुलमोहर | प्रभावी परागण और बीज प्रकीर्णन — इसीलिए सर्वाधिक विविध पर्यावास |
एक वाक्य में याद रखने योग्य: शैवाल से लेकर एंजियोस्पर्म तक पादप समूह संरचनात्मक परिवर्तनों का एक क्रम दर्शाते हैं जो स्थलीय जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायक हैं। आरंभिक पादप अवलंब और जनन के लिए जल पर निर्भर थे; क्रमशः उनमें परिवहन ऊतक, फिर बीज, फिर पुष्प विकसित हुए।