कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.9 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
प्रत्येक पादप समूह की विशिष्ट विशेषताओं का ध्यानपूर्वक अध्ययन कीजिए।
उत्तर

पाँचों समूहों को क्रम से पढ़िए और देखिए कि हर एक कौन-सी एक समस्या हल करता है। इस तरह रखने पर तालिका 12.3 सूची नहीं, एक क्रम बन जाती है।

समूहविशिष्ट विशेषताएँयह कौन-सी समस्या हल करता है
थैलोफाइटाशरीर थैलस जैसा; परिवेश से गैसों, पोषक तत्वों और जल का सीधा आदान-प्रदान; अधिकांशतः जलीय। उदाहरण: स्पाइरोगाइराअभी कोई नहीं — यह केवल जल के लिए भली-भाँति अनुकूलित है
ब्रायोफाइटामूलाभास, तने व पत्ती जैसी संरचनाएँ; संवहनी ऊतक नहीं; जनन के लिए जल आवश्यक। उदाहरण: मार्केशिया, मॉसस्थल पर निवास — परंतु केवल वहीं जहाँ नमी बनी रहे
टेरिडोफाइटावास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ; जाइलम और फ्लोएम; बीज नहीं; जनन के लिए जल आवश्यक। उदाहरण: फर्नपरिवहन और अवलंब — जिससे पौधा ऊँचा बढ़ सके
जिम्नोस्पर्मसुई या शल्क जैसी पत्तियाँ; बीज फलों में बंद नहीं, शंकुओं पर अनावृत; निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं। उदाहरण: चीड़, साइकैडजल के बिना जनन, तथा ठंडे और शुष्क स्थानों में उत्तरजीविता
एंजियोस्पर्मसुविकसित जड़, तना और पत्तियाँ; पुष्पों द्वारा लैंगिक जनन; बीज फलों के अंदर बंद; बीज कीटों, पक्षियों, जंतुओं, वायु या जल द्वारा प्रकीर्णित। उदाहरण: गुलमोहरप्रभावी परागण और बीज प्रकीर्णन — इसीलिए सर्वाधिक विविध पर्यावास
एक वाक्य में याद रखने योग्य: शैवाल से लेकर एंजियोस्पर्म तक पादप समूह संरचनात्मक परिवर्तनों का एक क्रम दर्शाते हैं जो स्थलीय जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायक हैं। आरंभिक पादप अवलंब और जनन के लिए जल पर निर्भर थे; क्रमशः उनमें परिवहन ऊतक, फिर बीज, फिर पुष्प विकसित हुए।
प्र2.
इन विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए और दी गई तालिका में समूह की उत्तरजीविता के लिए उनके लाभ तथा उनके समक्ष आई चुनौतियों अथवा अपवादों को लिखिए।
उत्तर

नीचे तालिका 12.3 पूरी भरकर दी गई है। पुस्तक की अपनी प्रविष्टियाँ रखी गई हैं और रिक्त पंक्तियाँ भरी गई हैं।

पादप समूहसमूह की उत्तरजीविता के लिए लाभअपवाद / चुनौतियाँ
थैलोफाइटासरल पादप काय संरचना इनकी उत्तरजीविता और जल में इनके प्रसार को सुगम करती है। पूरी सतह से जल, खनिज और गैसें सीधे अवशोषित होती हैं, अतः परिवहन ऊतक की आवश्यकता ही नहीं। अनेक जलीय आहार श्रृंखलाओं का आधार हैं और ऑक्सीजन निर्मुक्त करते हैं।ये स्थल पर नहीं रह सकते। न जड़ें, न उपत्वचा, न संवहनी ऊतक — जल से बाहर तुरंत सूख जाते हैं, ऊँचे नहीं बढ़ सकते और स्वयं को सँभाल नहीं सकते।
ब्रायोफाइटाये पादप जगत के उभयचर हैं। इनकी काया नम स्थल पर रहने के लिए अनुकूलित है। मूलाभास इन्हें चट्टान और मृदा से जोड़ देते हैं, अतः ये उन नंगी सतहों पर बस जाते हैं जहाँ और कुछ नहीं उगता, और स्पंज की भाँति नमी रोककर मृदा बनने में सहायक होते हैं।इन्हें सदा जल (नमी) की आवश्यकता होती है। संवहनी ऊतक न होने से ये छोटे और नीचे ही रह जाते हैं; नर युग्मकों को तैरना पड़ता है, अतः शुष्क मौसम में जनन रुक जाता है।
टेरिडोफाइटाये स्थल पर रहते हैं। ये पूरे पौधे में जल और भोजन का परिवहन करते हैं। वास्तविक जड़ें मृदा में गहरे जल तक पहुँचती हैं और जाइलम तने को कठोर करता है, अतः ये ऊँचे बढ़कर अपनी पत्तियाँ प्रतिस्पर्धियों से ऊपर रख सकते हैं।जल के अभाव में जनन नहीं होता। ये बीज नहीं बनाते, अतः बीजाणु में न संचित भोजन है न रक्षक आवरण, और वह केवल नम, छायादार स्थान पर ही अंकुरित हो सकता है।
जिम्नोस्पर्मपत्तियाँ शुष्क परिस्थितियों के लिए अनुकूलित होती हैं। जनन के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती। ये जीवन की निरंतरता के लिए बीज बनाते हैं। सुई जैसी पत्तियाँ और मोटी उपत्वचा ठंड, पवन और सूखा झेल लेती हैं, इसीलिए ये ऊँचे पर्वतों और ठंडे क्षेत्रों में छाए रहते हैं।बीज फल से आवृत नहीं होते। फल न होने से प्रकीर्णन में सहायता नहीं मिलती और अनावृत बीज सरलता से खा लिया जाता है; परागण पवन पर निर्भर है, अतः बहुत सारा परागकण व्यर्थ जाता है।
एंजियोस्पर्मये पुष्प, फल और बीज उत्पन्न करते हैं। इनका जनन तंत्र सुविकसित है। ये जीवन की निरंतरता के लिए बीज बनाते हैं। इनके बीज आवरित होते हैं। पुष्प परागणकर्ताओं को आकर्षित करते हैं, अतः बहुत कम परागकण व्यर्थ जाता है; फल बीज को जनक से दूर ले जाते हैं, अतः संतति जनक से प्रतिस्पर्धा नहीं करती।जनन विभिन्न कर्मकों द्वारा परागण पर निर्भर करता है। इनमें सुविकसित ऊतक तंत्र के माध्यम से जटिल प्रक्रियाएँ होती हैं। परागणकर्ता समाप्त हो जाए तो बीज बनना ही रुक जाता है — अर्थात पौधे की उत्तरजीविता किसी दूसरी जाति की उत्तरजीविता से बँध जाती है।
पूरी तालिका में दिखता प्रतिरूप: हर लाभ अपने साथ एक नई निर्भरता लाता है। संवहनी ऊतक फर्न को ऊँचा बढ़ने देता है, पर अब उसे नलिका प्रणाली बनाए भी रखनी है। बीज जिम्नोस्पर्म को जल से मुक्त करता है, पर अनावृत बीज असुरक्षित है। पुष्प एंजियोस्पर्म का जनन दक्ष बनाता है, पर उसे कीट, पक्षी या चमगादड़ से बाँध देता है। कोई भी समूह चुनौती से मुक्त नहीं है — और यही कारण है कि "श्रेष्ठ" समूह द्वारा शेष को हटा देने के बजाय आज भी इतने समूह साथ-साथ मिलते हैं।
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