प्र1.
स्पंज एक ही स्थान पर स्थिर रहते हैं और जलीय पर्यावरण में पाए जाते हैं। क्या आपको लगता है कि वे स्थल पर जीवित रह सकते हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर
नहीं। स्पंज स्थल पर जीवित नहीं रह सकता, क्योंकि उसके सभी जैव प्रक्रम उसके शरीर से बहते जल पर निर्भर हैं।
तंत्र क्या है: स्पंज बहुकोशिकीय तो है परंतु उसमें ऊतक और अंग संगठन नहीं होते। उसमें न मुख है, न आहार नाल, न क्लोम, न हृदय, न पेशियाँ, न तंत्रिका तंत्र। इसके स्थान पर उसके शरीर के अनेक छिद्रों से जल निरंतर बहता रहता है, और वही धारा एक साथ चार काम करती है —
- यह भोजन के कण सीधे कोशिकाओं तक पहुँचाती है;
- यह ऑक्सीजन सीधे कोशिकाओं तक पहुँचाती है;
- यह अपशिष्ट पदार्थों को बाहर ले जाती है;
- यह स्पंज की जनन कोशिकाओं को भी बाहर और भीतर ले जाती है।
क्या आप जानते हैं? अनुसंधान अध्ययन दर्शाते हैं कि एक किलोग्राम स्पंज प्रतिदिन 24000 लीटर समुद्री जल को निस्यंदित कर सकता है। यही एक आँकड़ा बता देता है कि यह जंतु धारा पर कितना पूर्णतः निर्भर है — वह जल में इतना नहीं रहता जितना अपने से होकर बहते जल पर जीता है।