कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 चिंतन कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
जैव विविधता से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर

जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की असीम विविधता — नग्न आँखों से दिखाई न देने वाले सूक्ष्मदर्शीय जीवों से लेकर विशाल वृक्षों तक, चमकदार जैलीफिश से लेकर आकाश में ऊँची उड़ान भरते गरुड़ तक; जीवन असंख्य रूपों और पर्यावासों में पाया जाता है।

यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: जैव विविधता केवल नामों की सूची नहीं है, यह वह तंत्र है जो पृथ्वी को चलाए रखता है। अध्याय चार ऐसे कार्य बताता है जो भिन्न-भिन्न जीव समूह करते हैं और इनमें से हर एक वह कड़ी है जिस पर शेष जीवन टिका है।
  • महासागरों के सूक्ष्मदर्शीय शैवाल अधिकांश ऑक्सीजन निर्मुक्त करते हैं जिसे हम श्वास द्वारा ग्रहण करते हैं।
  • कवक और जीवाणु गिरी पत्तियों को अपघटित करते हैं और अपशिष्ट को खाद में बदलकर मृदा को उर्वर बनाते हैं।
  • पक्षी, मधुमक्खियाँ और चमगादड़ पुष्पों का परागण करते हैं जिससे बीज और फल बनते हैं।
  • पादप सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करके वह भोजन बनाते हैं जो पृथ्वी के लगभग प्रत्येक जीव को जीवन देता है।
इनमें से कोई एक कड़ी हटा दीजिए तो शेष कमज़ोर पड़ जाती हैं। इसीलिए अध्याय कहता है कि यह अंतर्संबंध पारिस्थितिक तंत्रों को बनाए रखता है और पृथ्वी को सजीवों के लिए अनुकूल बनाता है।
ध्यान दीजिए: जैव विविधता एक से अधिक स्तरों पर मापी जाती है — जातियों की विविधता, एक ही जाति के भीतर की विविधता (किसान द्वारा सहेजी गई धान की विभिन्न किस्में), और पर्यावासों तथा पारितंत्रों की विविधता (मैंग्रोव, मरुस्थल, प्रवाल भित्ति)। इन तीनों ही दृष्टियों से भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाता है।
प्र2.
विविधता को समझने के लिए जीवों का समूहन किस प्रकार हमारी सहायता करता है?
उत्तर

समूहन एक अव्यवस्थित सूची को खोजने योग्य ढाँचे में बदल देता है — और चूँकि समूहन समान विशेषताओं के आधार पर होता है, इसलिए यह ढाँचा स्वयं यह सूचना रखता है कि जीव आपस में किस प्रकार संबंधित हैं।

यह कैसे कार्य करता है: अध्याय का अपना उदाहरण पुस्तकालय का है। कल्पना कीजिए कि हजारों पुस्तकें तल पर बिखरी हैं और आपको ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज चाहिए। विषय, लेखक और अनुभाग के बिना आपको हर पुस्तक देखनी पड़ेगी। करोड़ों जीवों के साथ भी यही समस्या है। समान गुणों के आधार पर छाँटने से एक साथ तीन काम होते हैं —
  • सूचना संक्षिप्त हो जाती है। जैसे ही आप जान गए कि कोई जंतु आर्थ्रोपोड है, आपको यह भी पता चल गया कि उसका शरीर खंडयुक्त है, उसमें संधित उपांग हैं और बहिःकंकाल है — हर कीट, केकड़े और मकड़ी के लिए ये तथ्य अलग से याद नहीं करने पड़ते।
  • पूर्वानुमान संभव होता है। यदि किसी नए जीव की कोशिका भित्ति काइटिन की है और वह अवशोषण से पोषण लेता है, तो उसे फंजाई में रखकर आप शेष कवकीय लक्षणों की अपेक्षा कर सकते हैं।
  • संबंध दिखते हैं। समान विशेषताएँ समान पूर्वज की ओर संकेत करती हैं, इसलिए ये समूह मनमाने डिब्बे नहीं बल्कि जीवन के वास्तविक इतिहास के चिह्न हैं।
करके देखिए: अपने आस-पास के दस जंतुओं को पहले पर्यावास के आधार पर समूहित कीजिए, फिर उन्हीं दस को खान-पान के आधार पर। सूचियाँ बदल जाएँगी। किस समूहन ने आपको यह अधिक बताया कि जंतु किस प्रकार बने हैं? यही तुलना क्रियाकलाप 12.1 करवाता है।
प्र3.
पादपों और जंतुओं को किस आधार पर वर्गीकृत किया जाता है?
उत्तर

दोनों का वर्गीकरण उन विशेषताओं पर होता है जो समान पूर्वज से मिली हैं — वैज्ञानिक पहले व्यापक और सरलता से दिखाई देने वाली विशेषताएँ देखते हैं, फिर सूक्ष्म विशेषताएँ। अध्याय सात प्रकार के प्रमाण गिनाता है।

मानदंडकिसकी तुलना होती है
बाह्य विशेषताएँआकार, आमाप और शारीरिक संगठन
पोषण की विधिस्वपोषी अथवा विषमपोषी
आंतरिक संरचनाएँकंकाल पैटर्न, अंगों की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति, ऊतकों के प्रकार
कोशिका संरचनाएककोशिकीय या बहुकोशिकीय; सुकेंद्रकी या पूर्वकेंद्रकी; कोशिका भित्ति उपस्थित या अनुपस्थित
पारिस्थितिकीय भूमिकाउत्पादक, उपभोक्ता अथवा अपघटक
जननअलैंगिक और/अथवा लैंगिक विधियाँ
आनुवंशिक समानतावंशागत गुणों की समानताएँ, जिनका अध्ययन डीएनए से किया जाता है

दोनों जगतों के भीतर पुस्तक एक-एक निर्णायक लक्षण लगाती है —

  • प्लांटी को पाँच वर्गों में इस आधार पर बाँटा गया है कि पादप काया जल से कितनी दूर आ चुकी है — थैलस (थैलोफाइटा), मूलाभास किंतु संवहनी ऊतक नहीं (ब्रायोफाइटा), वास्तविक जड़-तना-पत्ती के साथ जाइलम-फ्लोएम (टेरिडोफाइटा), अनावृत बीज (जिम्नोस्पर्म), फलों में बंद बीज (एंजियोस्पर्म)।
  • एनिमेलिया को पहले पृष्ठरज्जु पर बाँटा जाता है — अकशेरुकी में यह नहीं होती, कॉर्डेट में जीवन में कम-से-कम एक बार होती है — और फिर संगठन के स्तर, सममिति, देहगुहा, खंडीभवन और कंकाल पर।
संकेत: अच्छा वर्गीकरण लक्षण वह है जो सरलता से बदलता न हो और वंशागत हो। पर्यावास खराब लक्षण है — व्हेल, मछली और झींगा तीनों जल में रहते हैं परंतु इनकी शरीर रचना पूर्णतः भिन्न है।
प्र4.
वर्गीकरण कृषि की समस्याओं को दूर करने में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर

क्योंकि किसान की समस्याएँ — पीड़क, रोग, कमज़ोर मृदा, सूखा, परागण — सब विशिष्ट जीवों से जुड़ी समस्याएँ हैं, और जिस जीव की सही पहचान न हो उसका प्रबंधन नहीं किया जा सकता।

व्यवहार में यह कैसे काम आता है:
  • मित्र और शत्रु में अंतर। अध्याय इसी प्रश्न से आरंभ होता है — कुछ कीट फसलों की रक्षा करते हैं जबकि कुछ उन्हें क्षति पहुँचाते हैं। इंद्रगोप (लेडीबर्ड) भृंग और पत्ती खाने वाला भृंग दोनों आर्थ्रोपोडा हैं, परंतु वंश स्तर तक की सही पहचान ही तय करती है कि किसे बचाना है और किसे नियंत्रित करना है।
  • सही किस्म का चयन। सहस्र वर्षों से कृषक उपयोगी विशेषताओं वाली किस्में संरक्षित करते आए हैं — सूखा सहिष्णुता, पीड़क प्रतिरोधकता और न्यून पोषक तत्वों वाली मृदा में उगने की क्षमता। कौन-सी किस्म में कौन-सा गुण है, यह जानना वर्गीकरण का ही कार्य है, और इसीलिए विविधता से फसल के नष्ट होने का जोखिम कम होता है और खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ होती है
  • उपयोगी सूक्ष्मजीवों का उपयोग। राइजोबियम (मोनेरा) दलहन की मूल ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है; लैक्टोबैसिलस खाद्य पदार्थों में उपयोगी है। कवक अपघटक हैं जो मृदा में खनिज मुक्त करते हैं। इन सबका सुनियोजित उपयोग तभी संभव है जब इनकी पहचान और नामकरण हो चुका हो।
  • परागणकर्ताओं की रक्षा। पक्षी, मधुमक्खियाँ और चमगादड़ परागण करते हैं। फल और बीज बनना इन्हीं पर निर्भर है, अतः यह जानना कि किस फसल का परागण कौन करता है, किसान को बताता है कि कब और क्या छिड़काव नहीं करना है।
क्या आप जानते हैं? यही तर्क उल्टी दिशा में भी लागू होता है। मशरूम की खेती अब आजीविका का आशाजनक साधन बन रही है, परंतु वन से मशरूम सुरक्षित रूप से वही समुदाय एकत्र कर सकते हैं जिन्हें भरोसेमंद ज्ञान है कि कौन-से जंगली मशरूम खाद्य हैं और कौन-से विषैले — यह लोक वर्गिकी ठीक वही कार्य कर रही है जो वैज्ञानिक वर्गीकरण करता है।
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