जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की असीम विविधता — नग्न आँखों से दिखाई न देने वाले सूक्ष्मदर्शीय जीवों से लेकर विशाल वृक्षों तक, चमकदार जैलीफिश से लेकर आकाश में ऊँची उड़ान भरते गरुड़ तक; जीवन असंख्य रूपों और पर्यावासों में पाया जाता है।
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: जैव विविधता केवल नामों की सूची नहीं है, यह वह तंत्र है जो पृथ्वी को चलाए रखता है। अध्याय चार ऐसे कार्य बताता है जो भिन्न-भिन्न जीव समूह करते हैं और इनमें से हर एक वह कड़ी है जिस पर शेष जीवन टिका है।
- महासागरों के सूक्ष्मदर्शीय शैवाल अधिकांश ऑक्सीजन निर्मुक्त करते हैं जिसे हम श्वास द्वारा ग्रहण करते हैं।
- कवक और जीवाणु गिरी पत्तियों को अपघटित करते हैं और अपशिष्ट को खाद में बदलकर मृदा को उर्वर बनाते हैं।
- पक्षी, मधुमक्खियाँ और चमगादड़ पुष्पों का परागण करते हैं जिससे बीज और फल बनते हैं।
- पादप सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करके वह भोजन बनाते हैं जो पृथ्वी के लगभग प्रत्येक जीव को जीवन देता है।
इनमें से कोई एक कड़ी हटा दीजिए तो शेष कमज़ोर पड़ जाती हैं। इसीलिए अध्याय कहता है कि यह अंतर्संबंध पारिस्थितिक तंत्रों को बनाए रखता है और पृथ्वी को सजीवों के लिए अनुकूल बनाता है।
ध्यान दीजिए: जैव विविधता एक से अधिक स्तरों पर मापी जाती है — जातियों की विविधता, एक ही जाति के भीतर की विविधता (किसान द्वारा सहेजी गई धान की विभिन्न किस्में), और पर्यावासों तथा पारितंत्रों की विविधता (मैंग्रोव, मरुस्थल, प्रवाल भित्ति)। इन तीनों ही दृष्टियों से भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाता है।